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Showing posts from September, 2025

"डर का अटल सत्य: इसकी जड़ अविद्या है और आधार नियत।"

🔥 “कर्मयोग का प्रथम अध्याय: डर का अखंड सत्य — अविद्या बीज है, नियत मूल है, और मन उसका छाया-स्वरूप।”  🔥 ॐ कार्मिक । आरंभ । 🔥 मैं कौन हूँ? मैं क्यों हूँ? - ख़ुद से पूछें ✍️ आत्मगुरु से जीवन दर्शन ॐ सूत्र वाक्य “डर वो नहीं जो हमें दिखता है; डर वो है जो भीतर जड़ें जमा कर बैठा है।” । जज 📜 डर का अखंड सत्य संवाद: नियत ही जड़ है अध्याय: डर का अंतिम रहस्य — नियत की कसौटी "आज का अटल सूत्र: डर का तोड़ भ्रम और नियत।" जीवन की गहराई में उतरते हुए, मुझे एक अनोखा विचार आया। यह विचार वह अंधकार है, जिसे हर इंसान अपने भीतर महसूस करता है, और यही अंधकार है, हमारे बीच **डर (Dar)** बनकर खड़ा है। यह डर ही वह माया मोह है, जो श्रेष्ठ को भी धोखा दे जाता है। यह वहम है कि हमारी समस्या बाहर है, जबकि वह हमारे भीतर जड़ जमाए ...

"मैं कौन हूँ? एक आम इंसान फिर भी खास: आत्मगुरू से जीवन दर्शन"

🔥  "एक किसान की आत्मबोध यात्रा: जहाँ साधारण असाधारण बन जाता है" प्रिय मित्र, यह लेख पढ़ने के लिए नहीं — महसूस करने के लिए है। यह कोई साधारण लेख नहीं, बल्कि भीतर के संवाद की कथा है — जहाँ मन, बुद्धि और चेतना आमने-सामने आते हैं। हर पंक्ति में एक अनुभव है, हर शब्द में एक तप है। “सत्य पढ़ा नहीं जाता — जिया जाता है।” मैं नहीं चाहता कि आप इसे “समालोचना” के रूप में पढ़ें, बल्कि कुछ क्षण के लिए स्वयं से मिलें। यह लेख शायद तुरंत न समझ आए — पर यदि आप मौन में उतरेंगे, तो यह लेख आपके भीतर बोलेगा। कृपया इसे अपने शान्ति और समय के क्षणों में पढ़ें — फिर जो अनुभूति भीतर उठे, वही आपका उत्तर होगा। 🔥 ॐ कार्मिक । आरंभ । 🔥 मैं कौन हूँ? मैं क्यों हूँ? - ख़ुद से पूछें ✍️ आत्मगुरु से जीवन दर्शन ॐ सूत्र वाक्य “लोग सपनों मे...